सहमा सहमा डरा सा रहता है
जानें क्यूँ जी भरा सा रहता है
काई सी जम गई है आँखों पर
सारा मंज़र हरा सा रहता है
एक पल देख लूँ तो उठता हूँ
जल गया सब ज़रा सा रहता है
इश्क़ में और कुछ नहीं होता
आदमी बावरा सा रहता है
सहमा सहमा डरा सा रहता है
जानें क्यूँ जी भरा सा रहता है
काई सी जम गई है आँखों पर
सारा मंज़र हरा सा रहता है
एक पल देख लूँ तो उठता हूँ
जल गया सब ज़रा सा रहता है
इश्क़ में और कुछ नहीं होता
आदमी बावरा सा रहता है
sahmā sahmā ḍarā sā rahtā hai
jāneṅ kyūṇ jī bharā sā rahtā hai
kāī sī jam gaī hai āṇkhoṅ par
sārā maṅzar harā sā rahtā hai
ek pal dekh lūṇ to uṭhtā hūṇ
jal gayā sab zarā sā rahtā hai
iśhq meṅ aur kuchh nahīṅ hotā
ādmī bāvrā sā rahtā hai