कुछ ना किसी से बोलेंगे
तन्हाई में रो लेंगे
हम बे-राह-रवों का क्या
साथ किसी के हो लेंगे
ख़ुद तो हुये रुस्वा लेकिन
तेरे भेद न खोलेंगे
जीवन ज़हर भरा सागर
कब तक अम्रत घोलेंगे
नींद तो क्या आयेगी 'फ़राज़्'
मौत आयी तो सो लेंगे
कुछ ना किसी से बोलेंगे
तन्हाई में रो लेंगे
हम बे-राह-रवों का क्या
साथ किसी के हो लेंगे
ख़ुद तो हुये रुस्वा लेकिन
तेरे भेद न खोलेंगे
जीवन ज़हर भरा सागर
कब तक अम्रत घोलेंगे
नींद तो क्या आयेगी 'फ़राज़्'
मौत आयी तो सो लेंगे
kuchh nā kisī se boleṅge
tanhāī meṅ ro leṅge
ham be-rāh-ravoṅ kā kyā
sāth kisī ke ho leṅge
khud to huye rusvā lekin
tere bhed na kholeṅge
jīvan zahar bharā sāgar
kab tak amrat gholeṅge
nīṅd to kyā āyegī 'farāz'
maut āyī to so leṅge