ग़म-ए-दिल किसी से छुपाना पड़ेगा
घड़ी दो घड़ी मुस्कुराना पड़ेगा
बहुत बच के निकले मगर क्या ख़बर थी
इधर भी तेरा आस्ताना पड़ेगा
चलो मयकदे में बसेरा ही कर लो
न आना पड़ेगा न जाना पड़ेगा
नहीं भुलता 'सैफ़्' अहद-ए-तमना
मगर रफ़्ता रफ़्ता भुलाना पड़ेगा
ग़म-ए-दिल किसी से छुपाना पड़ेगा
घड़ी दो घड़ी मुस्कुराना पड़ेगा
बहुत बच के निकले मगर क्या ख़बर थी
इधर भी तेरा आस्ताना पड़ेगा
चलो मयकदे में बसेरा ही कर लो
न आना पड़ेगा न जाना पड़ेगा
नहीं भुलता 'सैफ़्' अहद-ए-तमना
मगर रफ़्ता रफ़्ता भुलाना पड़ेगा
ġham-e-dil kisī se chhupānā paṛegā
ghaṛī do ghaṛī muskurānā paṛegā
bahut bach ke nikle magar kyā khabar thī
idhar bhī terā āstānā paṛegā
chalo mayakde meṅ baserā hī kar lo
na ānā paṛegā na jānā paṛegā
nahīṅ bhultā 'saif' ahad-e-tamnā
magar raftā raftā bhulānā paṛegā