आँख से आँख मिलाता है कोई
दिल को खींचे लिये जाता है कोई
है ये हैरत कि भरी महफ़िल में
मुझको तन्हा नज़र आता है कोई
चाहिये ख़ुद पे यक़ीन-ए-क़ामिल
हौसला किसका बढ़ाता है कोई
सब करिश्मात-ए-तसव्वुर है शक़ील
वन.रा आता है न जाता है कोई
आँख से आँख मिलाता है कोई
दिल को खींचे लिये जाता है कोई
है ये हैरत कि भरी महफ़िल में
मुझको तन्हा नज़र आता है कोई
चाहिये ख़ुद पे यक़ीन-ए-क़ामिल
हौसला किसका बढ़ाता है कोई
सब करिश्मात-ए-तसव्वुर है शक़ील
वन.रा आता है न जाता है कोई
āṇkh se āṇkh milātā hai koī
dil ko khīṅche liye jātā hai koī
hai ye hairat ki bharī mahafil meṅ
mujhko tanhā nazar ātā hai koī
chāhiye khud pe yaqīn-e-qāmil
hauslā kiskā baṛhātā hai koī
sab kariśhmāt-e-tasavvur hai śhaqīl
van.rā ātā hai na jātā hai koī