निस दिन बरसत नैन हमारे
सदा रहत पावस रितु हम पर
जब से शाम सिधारे
अंजन थिर न रहत अँखियन में
कर-कपोल भये कारे
कंचुकी पट सूखत नहि कबहूँ
उर बिच बहत पनारे
आँसु सलिल भये पग थाके
बहे जात सित तारे
सूरदास अब डूबत है
ब्रज काहे न लेत उबारे
निस दिन बरसत नैन हमारे
सदा रहत पावस रितु हम पर
जब से शाम सिधारे
अंजन थिर न रहत अँखियन में
कर-कपोल भये कारे
कंचुकी पट सूखत नहि कबहूँ
उर बिच बहत पनारे
आँसु सलिल भये पग थाके
बहे जात सित तारे
सूरदास अब डूबत है
ब्रज काहे न लेत उबारे
nis din barasat nain hamāre
sadā rahat pāvas ritu ham par
jab se śhām sidhāre
aṅjan thir na rahat aṇkhiyan meṅ
kar-kapol bhaye kāre
kaṅchukī paṭ sūkhat nahi kabhūṇ
ur bich bahat panāre
āṇsu salil bhaye pag thāke
bahe jāt sit tāre
sūrdās ab ḍūbat hai
braj kāhe na let ubāre