निगाहों से हमें समझा रहे हैं
नवाज़िश है करम फ़रमा रहे हैं
मैं जितना पास आना चाहता हूँ
वो उतना दूर होते जा रहे हैं
मैं क्या कहता किसी से बीती बातें
वो ख़ुद ही दास्ताँ दोहरा रहे हैं
फ़साना शौक़ का ऐसे सुना है
तबस्सुम ज़ेर-ए-लब फ़रमा रहे हैं
निगाहों से हमें समझा रहे हैं
नवाज़िश है करम फ़रमा रहे हैं
मैं जितना पास आना चाहता हूँ
वो उतना दूर होते जा रहे हैं
मैं क्या कहता किसी से बीती बातें
वो ख़ुद ही दास्ताँ दोहरा रहे हैं
फ़साना शौक़ का ऐसे सुना है
तबस्सुम ज़ेर-ए-लब फ़रमा रहे हैं
nigāhoṅ se hameṅ samjhā rahe haiṅ
navāziśh hai karam farmā rahe haiṅ
maiṅ jitnā pās ānā chāhtā hūṇ
vo utnā dūr hote jā rahe haiṅ
maiṅ kyā kahtā kisī se bītī bāteṅ
vo khud hī dāstāṇ dohrā rahe haiṅ
fasānā śhauq kā aise sunā hai
tabassum zer-e-lab farmā rahe haiṅ