नाज़ था ख़ुद पर मगर ऐसा न था
आइने में जब तलक देखा न था
शहर की महरूमियाँ मत पूछिये
भीड़ थी पर कोई भी अपना न था
मंज़िलें आवाज़ देती रह गईं
हम पहुँच जाते मगर रस्ता न था
इतनी दिलकश थी कहाँ ये ज़िंदगी
हमने जब तक आपको चाहा न था
नाज़ था ख़ुद पर मगर ऐसा न था
आइने में जब तलक देखा न था
शहर की महरूमियाँ मत पूछिये
भीड़ थी पर कोई भी अपना न था
मंज़िलें आवाज़ देती रह गईं
हम पहुँच जाते मगर रस्ता न था
इतनी दिलकश थी कहाँ ये ज़िंदगी
हमने जब तक आपको चाहा न था
nāz thā khud par magar aisā na thā
āine meṅ jab talak dekhā na thā
śhahar kī mahrūmiyāṇ mat pūchhiye
bhīṛ thī par koī bhī apnā na thā
maṅzileṅ āvāz detī rah gaīṅ
ham pahuṇch jāte magar rastā na thā
itnī dilkaśh thī kahāṇ ye ziṅdgī
hamne jab tak āpko chāhā na thā