न उड़ा यूँ ठोकरों से मेरी ख़ाक-ए-कब्र ज़ालिम
यही एक रह गई है मेरे प्यार की निशानी
तुझे पहले ही कहा था है जहाँ सराय-ए-फ़ानी
दिल-ए-बदनसीब तूने मेरी बात ही ना मानी
ये इनायत गज़ब की ये बला की मेहरबानी
मेरी ख़ैरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी
न उड़ा यूँ ठोकरों से मेरी ख़ाक-ए-कब्र ज़ालिम
यही एक रह गई है मेरे प्यार की निशानी
तुझे पहले ही कहा था है जहाँ सराय-ए-फ़ानी
दिल-ए-बदनसीब तूने मेरी बात ही ना मानी
ये इनायत गज़ब की ये बला की मेहरबानी
मेरी ख़ैरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी
na uṛā yūṇ ṭhokroṅ se merī khāk-e-kabr zālim
yahī ek rah gaī hai mere pyār kī niśhānī
tujhe pahle hī kahā thā hai jahāṇ sarāy-e-fānī
dil-e-badansīb tūne merī bāt hī nā mānī
ye ināyat gazab kī ye balā kī meharbānī
merī khairiyat bhī pūchhī kisī aur kī zabānī