मुसाफ़िर चलते चलते थक गया है
सफ़र जाने अभी कितना पड़ा है
मक़ाँ के सब मक़ीं सोये पड़े हैं
हवा का शोर मुझसे कह रहा है
वो मेरे सामने बैठा है लेकिन
दिलों के बीच कितना फ़ासला है
मुसाफ़िर चलते चलते थक गया है
सफ़र जाने अभी कितना पड़ा है
मक़ाँ के सब मक़ीं सोये पड़े हैं
हवा का शोर मुझसे कह रहा है
वो मेरे सामने बैठा है लेकिन
दिलों के बीच कितना फ़ासला है
musāfir chalte chalte thak gayā hai
safar jāne abhī kitnā paṛā hai
maqāṇ ke sab maqīṅ soye paṛe haiṅ
havā kā śhor mujhse kah rahā hai
vo mere sāmne baiṭhā hai lekin
diloṅ ke bīch kitnā fāslā hai