मुहब्बत करने वाले कम न होंगे
तेरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
ज़माने भर के ग़म या इक तेरा ग़म
ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे
अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाये
तेरी फ़ुरक़त के सदमें कम न होंगे
मुहब्बत करने वाले कम न होंगे
तेरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
ज़माने भर के ग़म या इक तेरा ग़म
ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे
अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाये
तेरी फ़ुरक़त के सदमें कम न होंगे
muhabbat karne vāle kam na hoṅge
terī mahafil meṅ lekin ham na hoṅge
zamāne bhar ke ġham yā ik terā ġham
ye ġham hogā to kitne ġham na hoṅge
agar tū ittifāqan mil bhī jāye
terī furaqat ke sadmeṅ kam na hoṅge