मेरे दिल के अरमान मर कर न निकले
मेरे दिल के अरमान मर कर न निकले
जो दिल में चुभे फिर वो निश्तर न निकले
कलीम आये तो खुल के जलवा दिखाया
हम आये तो परदे के बाहर न निकले
नशेमन में गुज़रे कई मौसम-ए-गुल
क़फ़स में जो टूटे थे वो पर न निकले
बिठाया 'रियाज़्' इस तरह जोफ़-ए-दिल ने
बहार आई हम घर से बाहर न निकले
mere dil ke armān mar kar na nikle
jo dil meṅ chubhe phir vo niśhtar na nikle
kalīm āye to khul ke jalvā dikhāyā
ham āye to parde ke bāhar na nikle
naśheman meṅ guzre kaī mausam-e-gul
qafas meṅ jo ṭūṭe the vo par na nikle
biṭhāyā 'riyāz' is tarah jof-e-dil ne
bahār āī ham ghar se bāhar na nikle