लोग कहते हैं अजनबी तुम हो
अजनबी मेरी ज़िंदगी तुम हो
दिल किसी और का न हो पाया
आरज़ू मेरी आज भी तुम हो
मुझको अपना शरीक-ए-ग़म कर लो
यूँ अकेले बहुत दुखी तुम हो
दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें
किस ज़माने के आदमी तुम हो
लोग कहते हैं अजनबी तुम हो
अजनबी मेरी ज़िंदगी तुम हो
दिल किसी और का न हो पाया
आरज़ू मेरी आज भी तुम हो
मुझको अपना शरीक-ए-ग़म कर लो
यूँ अकेले बहुत दुखी तुम हो
दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें
किस ज़माने के आदमी तुम हो
log kahte haiṅ ajanbī tum ho
ajanbī merī ziṅdgī tum ho
dil kisī aur kā na ho pāyā
ārazū merī āj bhī tum ho
mujhko apnā śharīk-e-ġham kar lo
yūṇ akele bahut dukhī tum ho
dostoṅ se vafā kī ummīdeṅ
kis zamāne ke ādmī tum ho