ख़ुश्बू ग़ुँचे तलाश करती है
बीते रिश्ते तलाश करती है
जब गुज़रती है उस गली से सबा
ख़त के पुर्ज़े तलाश करती है
अपने माज़ी की जुस्तजू में बहार
पीले पत्ते तलाश करती है
एक उम्मीद बार बार आ कर
अपने टुकड़े तलाश करती है
ख़ुश्बू ग़ुँचे तलाश करती है
बीते रिश्ते तलाश करती है
जब गुज़रती है उस गली से सबा
ख़त के पुर्ज़े तलाश करती है
अपने माज़ी की जुस्तजू में बहार
पीले पत्ते तलाश करती है
एक उम्मीद बार बार आ कर
अपने टुकड़े तलाश करती है
khuśhbū ġhuṇche talāśh kartī hai
bīte riśhte talāśh kartī hai
jab guzartī hai us galī se sabā
khat ke purze talāśh kartī hai
apne māzī kī justjū meṅ bahār
pīle patte talāśh kartī hai
ek ummīd bār bār ā kar
apne ṭukaṛe talāśh kartī hai