कोई हद नहीं है कमाल की
कोई हद नहीं है जमाल की
वो ही क़ुर्ब-ओ-दूर की मंज़िलें
वोही शाम ख़ाब-ओ-ख़याल की
न मुझे ही उसका पता कोई
न उसे ख़बर मेरे हाल की
ये जवाब मेरी सदा का है
के सदा है उसके सवाल की
है 'मुनीर्' सुबह-ए-सफ़र नई
गई बात शब के मलाल की
कोई हद नहीं है कमाल की
कोई हद नहीं है जमाल की
वो ही क़ुर्ब-ओ-दूर की मंज़िलें
वोही शाम ख़ाब-ओ-ख़याल की
न मुझे ही उसका पता कोई
न उसे ख़बर मेरे हाल की
ये जवाब मेरी सदा का है
के सदा है उसके सवाल की
है 'मुनीर्' सुबह-ए-सफ़र नई
गई बात शब के मलाल की
koī had nahīṅ hai kamāl kī
koī had nahīṅ hai jamāl kī
vo hī qurb-o-dūr kī maṅzileṅ
vohī śhām khāb-o-khayāl kī
na mujhe hī uskā patā koī
na use khabar mere hāl kī
ye javāb merī sadā kā hai
ke sadā hai uske savāl kī
hai 'munīr' subah-e-safar naī
gaī bāt śhab ke malāl kī