कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद
आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद
दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इसका कोई नहीं है हल शायद
राख़ को भी कुरेद कर देखो
अब भी जलता हो कोई पल शायद्
कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद
आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद
दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इसका कोई नहीं है हल शायद
राख़ को भी कुरेद कर देखो
अब भी जलता हो कोई पल शायद्
koī aṭkā huā hai pal śhāyad
vaqt meṅ paṛ gayā hai bal śhāyad
ā rahī hai jo chāp qadmoṅ kī
khil rahe haiṅ kahīṅ kṇval śhāyad
dil agar hai to dard bhī hogā
iskā koī nahīṅ hai hal śhāyad
rākh ko bhī kured kar dekho
ab bhī jaltā ho koī pal śhāyad