कितनी मुद्दत बाद मिले हो
किन सोचों में गुम रहते हो
कौनसी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यों लगते हो
हमसे न पूछो हिज्र के किस्से
अपनी कहो, अब तुम कैसे हो
तेज़ हवा ने मुझसे पूछा,
रेत पे क्या लिखते रहते हो
कितनी मुद्दत बाद मिले हो
किन सोचों में गुम रहते हो
कौनसी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यों लगते हो
हमसे न पूछो हिज्र के किस्से
अपनी कहो, अब तुम कैसे हो
तेज़ हवा ने मुझसे पूछा,
रेत पे क्या लिखते रहते हो
kitnī muddat bād mile ho
kin sochoṅ meṅ gum rahte ho
kaunsī bāt hai tum meṅ aisī
itne achchhe kyoṅ lagte ho
hamse na pūchho hijr ke kisse
apnī kaho, ab tum kaise ho
tez havā ne mujhse pūchhā,
ret pe kyā likhte rahte ho