जहाँ में कोई नहीं है अपना हर एक को ख़ूब आज़्माया
हुई करम की जहां तवक़्क़ो, उसी ने जी खोल कर सताया
किसी की बर्बाद ज़िन्दगी है, किसी को रोना है अपने दिल का
तुम्हीं बता दो बजुज़ ज़ियां के किसी ने क्या तुम से मिल के पया
हर एक ज़र्रे से तुम को पूछा, हर एक गोशे में दी सदाएं
पता तो दो कुछ कहाँ छुपे हो कि हर जगह तुम को ढूँढ आया
जो हाँ कहूँ उनपे हर्फ़ आए, नहीं जो कह दूँ तो मैं ही झूटा
सवाल करते हैं वोह मुझी से, के हम ने दिल को तेरे दुखाया