जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं
ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं
क्यूँ शिकन डालते हो माथे पर
भूल कर आ गए हम जाते हैं
कश्तियाँ यूँ भी डूब जाती हैं
नाख़ुदा किसलिये डराते हैं
इक हसीं आँख के इशारे पर
क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं
जब तेरे नैन मुस्कुराते हैं
ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं
क्यूँ शिकन डालते हो माथे पर
भूल कर आ गए हम जाते हैं
कश्तियाँ यूँ भी डूब जाती हैं
नाख़ुदा किसलिये डराते हैं
इक हसीं आँख के इशारे पर
क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं
jab tere nain muskurāte haiṅ
zīst ke raṅj bhūl jāte haiṅ
kyūṇ śhikan ḍālte ho māthe par
bhūl kar ā gae ham jāte haiṅ
kaśhtiyāṇ yūṇ bhī ḍūb jātī haiṅ
nākhudā kisliye ḍarāte haiṅ
ik hasīṅ āṇkh ke iśhāre par
qāfile rāh bhūl jāte haiṅ