गुँचा-ए-शौक़ लगा है खिलने
फिर तुझे याद किया है दिल ने
दास्तानें हैं लब-ए-आलम पर
हम तो चुप चाप गये थे मिलने
मैंने छुप कर तेरी बातें की थीं
जाने कब जान लिया महफ़िल ने
गुँचा-ए-शौक़ लगा है खिलने
फिर तुझे याद किया है दिल ने
दास्तानें हैं लब-ए-आलम पर
हम तो चुप चाप गये थे मिलने
मैंने छुप कर तेरी बातें की थीं
जाने कब जान लिया महफ़िल ने
guṇchā-e-śhauq lagā hai khilne
phir tujhe yād kiyā hai dil ne
dāstāneṅ haiṅ lab-e-ālam par
ham to chup chāp gaye the milne
maiṅne chhup kar terī bāteṅ kī thīṅ
jāne kab jān liyā mahafil ne