गरचे सौ बार ग़म-ए-हिज्र से जाँ गुज़री है
फिर भी जो दिल पे गुज़रनी थी कहाँ गुज़री है
आप ठहरे हैं तो ठहरा है निज़ाम-ए-आलम
आप गुज़रे हैं तो इक मौज-ए-रवाँ गुज़री है
होश में आये तो बतलाये तेरा दीवाना
दिन गुज़ारा है कहाँ रात कहाँ गुज़री है
गरचे सौ बार ग़म-ए-हिज्र से जाँ गुज़री है
फिर भी जो दिल पे गुज़रनी थी कहाँ गुज़री है
आप ठहरे हैं तो ठहरा है निज़ाम-ए-आलम
आप गुज़रे हैं तो इक मौज-ए-रवाँ गुज़री है
होश में आये तो बतलाये तेरा दीवाना
दिन गुज़ारा है कहाँ रात कहाँ गुज़री है
garche sau bār ġham-e-hijr se jāṇ guzrī hai
phir bhī jo dil pe guzarnī thī kahāṇ guzrī hai
āp ṭhahre haiṅ to ṭhahrā hai nizām-e-ālam
āp guzre haiṅ to ik mauj-e-ravāṇ guzrī hai
hośh meṅ āye to batlāye terā dīvānā
din guzārā hai kahāṇ rāt kahāṇ guzrī hai