देखकर दिलक़शी ज़माने की
आरज़ू है फ़रेब खाने की
ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़
मुझको आदत है मुस्कुराने की
ज़ुल्मतों से न डर के रस्ते में
रोशनी है शराबख़ाने की
आ तेरे गेसुओं को प्यार करूँ
रात है मशअलें जलाने की
देखकर दिलक़शी ज़माने की
आरज़ू है फ़रेब खाने की
ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़
मुझको आदत है मुस्कुराने की
ज़ुल्मतों से न डर के रस्ते में
रोशनी है शराबख़ाने की
आ तेरे गेसुओं को प्यार करूँ
रात है मशअलें जलाने की
dekhkar dilaqśhī zamāne kī
ārazū hai fareb khāne kī
ai ġham-e-ziṅdgī na ho nārāz
mujhko ādat hai muskurāne kī
zulmtoṅ se na ḍar ke raste meṅ
rośhnī hai śharābakhāne kī
ā tere gesuoṅ ko pyār karūṇ
rāt hai maśhaaleṅ jalāne kī