बिन बारिश बरसात न होगी
रात गई तो रात न होगी
राज़-ए-मोहब्बत तुम मत पूछो
मुझसे तो ये बात न होगी
किससे दिल बहलाओगे तुम
जिस दम मेरी ज़ात न होगी
अश्क़ भी अब नाफ़ैद हुये हैं
शायद अब बरसात न होगी
यूँ देखेंगे 'आरिफ़्' उसको
बीच में अपनी ज़ात न होगी
बिन बारिश बरसात न होगी
रात गई तो रात न होगी
राज़-ए-मोहब्बत तुम मत पूछो
मुझसे तो ये बात न होगी
किससे दिल बहलाओगे तुम
जिस दम मेरी ज़ात न होगी
अश्क़ भी अब नाफ़ैद हुये हैं
शायद अब बरसात न होगी
यूँ देखेंगे 'आरिफ़्' उसको
बीच में अपनी ज़ात न होगी
bin bāriśh barsāt na hogī
rāt gaī to rāt na hogī
rāz-e-mohabbat tum mat pūchho
mujhse to ye bāt na hogī
kisse dil bahlāoge tum
jis dam merī zāt na hogī
aśhq bhī ab nāfaid huye haiṅ
śhāyad ab barsāt na hogī
yūṇ dekheṅge 'ārif' usko
bīch meṅ apnī zāt na hogī