बेज़ुबानी ज़ुबाँ न हो जाये
राज़-ए-उल्फ़त अयाँ न हो जाये
इस क़दर प्यार से न देख मुझे
फिर तमन्ना जवाँ न हो जाये
लुत्फ़ आने लगा जफ़ाओं में
वो कहीं मेहरबाँ न हो जाये
ज़िक्र उनका ज़ुबान पर आया
ये कहीं दास्ताँ न हो जाये
बेज़ुबानी ज़ुबाँ न हो जाये
राज़-ए-उल्फ़त अयाँ न हो जाये
इस क़दर प्यार से न देख मुझे
फिर तमन्ना जवाँ न हो जाये
लुत्फ़ आने लगा जफ़ाओं में
वो कहीं मेहरबाँ न हो जाये
ज़िक्र उनका ज़ुबान पर आया
ये कहीं दास्ताँ न हो जाये
bezubānī zubāṇ na ho jāye
rāz-e-ulfat ayāṇ na ho jāye
is qadar pyār se na dekh mujhe
phir tamannā javāṇ na ho jāye
lutf āne lagā jafāoṅ meṅ
vo kahīṅ meharbāṇ na ho jāye
zikra unkā zubān par āyā
ye kahīṅ dāstāṇ na ho jāye