श्रे: यादों में अक्सर आते रहे
कुछ पल हंसाते रुलाते रहे
तुमको भुला ना पाये कभी
लगता है तुम साथ में हो अभी
शा: क्या ख़ूब लम्हें हैं
हम आज फिर से हैं साथ
श्रे: उड़ के चले आसमाँ के पार
जिनकी तमन्ना है बार-बार
शा: हे हे ल ला ल ला
हे ल ला ल ला आ हा
बिखरे हुये ख़ाब कितने
आँखें हैं ख़ुद में बसाये
ख़ाबों में ना मिल सके जो
आओ उन्हें ढूँढ लायेँ
फिर हो के सच ख़ाब अपने
श्रे: चलने लगेंगे साथ-साथ
समझो ना तुम ये ज़रा सी बात
शा: समंदर की लहरों को देखो
टूटें मगर थम ना जायेँ
साहिल से मिलने की ख़ातिर
ले के उम्मीदें वो आयेँ
श्रे: हम-तुम भी लहरों की तरहा
मिलते रहेंगे बार-बार
लम्हें ये आयेंगे बार-बार्