वो हँस के मिले हमसे, हम प्यार समझ बैठे
बेकार ही उल्फ़त का इजहार समझ बैठे
ऐसी तो न थी किस्मत अपना भी कोई होता
क्यों खुद को मोहब्बत का हकदार समझ बैठे
रोये तो भला कैसे, खोले तो जुबान क्यों कर
डर ये है के जाने क्या संसार समझ बैठे
वो हँस के मिले हमसे, हम प्यार समझ बैठे
बेकार ही उल्फ़त का इजहार समझ बैठे
ऐसी तो न थी किस्मत अपना भी कोई होता
क्यों खुद को मोहब्बत का हकदार समझ बैठे
रोये तो भला कैसे, खोले तो जुबान क्यों कर
डर ये है के जाने क्या संसार समझ बैठे
vo hṇs ke mile hamse, ham pyār samajh baiṭhe
bekār hī ulफ़t kā ijhār samajh baiṭhe
aisī to na thī kismat apnā bhī koī hotā
kyoṅ khud ko mohabbat kā hakdār samajh baiṭhe
roye to bhalā kaise, khole to jubān kyoṅ kar
ḍar ye hai ke jāne kyā saṅsār samajh baiṭhe