को: तू ही तू -28
जा: आ आ
तू ही तू -6
को: तू ही तू -6
जा: हसीं तसबीह के दानों में
परिन्दों की उड़ानों में
ज़र्रों में चट्टानों में
को: ज़र्रों में चट्टानों में
जा: जहाँ की हर ज़ुबानों में
मैं कहूँ हर शै में
आ आ आ
मैं कहूँ हर शै में
तू ही तू -3
को: तू ही तू -6
रु: हसीं तसबीह के दानों में
परिन्दों की उड़ानों में
ज़र्रों में चट्टानों में
को: ज़र्रों में चट्टानों में
रु: जहाँ की हर ज़ुबानों में
मैं कहूँ हर शै में
ओ ओ ओ
मैं कहूँ हर शै में
तू ही तू -3
को: तू ही तू -6
जा: हा आ आ
तमनाओं के सहरा में हसीं गुलज़ार देखा है -2
मेरी नज़रों ने जिस दिन से तेरा दरबार देखा है
को: देखा है
रु: देखा है
को: हाँ देखा है
रु: हाँ देखा हाँ देखा
को: मेरे मौला
रु: हो देखा है
को: हाँ देखा है
रु: तुझे देखा नहीं लेकिन तुझे महसूस करते हैं
तेरा दीदार हो हासिल तमन्ना दिल में रखते हैं
तमन्ना दिल में रखते हैं -2
को: तमन्ना दिल में रखते हैं -6
रु: दूर रह कर भी है आ आ आ
को: रूबरू -3
रु: रूबरू
को: तू ही तू
रु: तू ही तू
को: तू ही तू -6
को: नि नि नि सा सा सा नि नि सा
जा: जो दिल से माँगी जाती है दुआ ख़ाली नहीं जाती -2
तेरे वादों में है शामिल के ये ताली नहीं जाती
को: तेरा जलवा
जा: सितारों में
को: तेरा जलवा
जा: बहारों में
को: मेरे मौला
जा: नज़ारों में
को: तेरा जलवा
रु: तू जिस दिल की भी दुनिया में मोहब्बत बन के है शामिल
वो अपनी ख़्वाहिशों के ख़ाब को क्यूँ ना करे हासिल
कहो क्यूँ ना करे हासिल -2
को: कहो क्यूँ ना करे हासिल -2
रु: मेरे मौला
को: कहो क्यूँ ना करे हासिल
अजी क्यूँ ना करे हासिल
रु: करम फ़रमा
को: कहो क्यूँ ना करे हासिल
कहो क्यूँ ना करे हासिल
रु: दिल को है बस तेरी ओ
आ आ आ -3
को: जुस्तजू -3
तू ही तू -9
जा: हसीं तसबीह
को: के दानों में
जा: परिन्दों की
को: उड़ानों में
जा: ज़र्रों में चट्टानों में
को: ज़र्रों में चट्टानों में
दो: जहाँ की हर ज़ुबानों में
मैं कहूँ हर शै में
आ आ आ
मैं कहूँ हर शै में
तू ही तू -9
को: तू ही तू -47
रु: हा
आ
मेरे मौला
मेरे आक़ा
मेरे मौला