र: तय्यब अली प्यार का दुशमन हाय्! हाय्!
मेरी जान का दुशमन हाय्! हाय्!
लड़का और लड़की
को: राज़ी
र: फिर भी न माने
को: क़ाज़ी
र: ये ज़िद्द न छोड़े, मेरे दिल को तोड़े
ये बनने न दे मेरी सलमा को मेरी दुल्हन
तय्यब अली प्यार का दुशमन हाय्! हाय्!
र: लकड़ी बेचे और न समझे, लड़की के अरमानों को
मोटा सेठ तराज़ू में तोले
हाँ तराज़ू में तोले
छोटे इन्सानों को
हो जाये बुड्ढा
को: हाँ जी
र: अल्लाह को प्यारा
को: हाँ जी
र: मैं कर लूँ शादी
खाना आबादी
सुलझ जाये पल में मेरी बरसों की उलझन
तय्यब अली …
साठ बरस की उमर में ऐसे चेहरा किसी का खिलता है
हमको है मालूम किसी से, किसी से
छुपकर ये भी मिलता है
मैं नाम बताऊँ?
मु: न जी, न जी, न जी
र: तसवीर दिखाऊँ?
मु: न जी, न जी, न जी
र: डर गया ये कैसे
बाज़ार में ऐसे
शरीफ़ों को हम रुसवा नहीं करते मियाँ जुम्मन
तय्यब अली …