के: Strawberry आँखें, सोचती क्या हैं
लड़की तुम हो महलों में हो पली
वो ice cream हो जो है फ़्रिज्् में रखी
तुमने जो भी कहा, वो हमेशा हुआ
तुम्हें हर चीज़ मिली, mercedes मिली
फिर भी आँखों में है, कोई ग़म छुपा हुआ
फिर भी तुम खुश नहीं, बोलो है बात क्या
ऐं? no reaction? volume double करूँ?
Strawberry आँखें …
तुम दिल की हर इक बात पे क्यों इतनी हो बेज़ार
तुम प्यार के सब ख़्वाबों को भी कहती हो बेकार
पगली कहीं हो तो नहीं
लाऊँ मैं क्या, कोई दवा?
कविता: कोई पगली वगली नहीं मैं, सुनो
दवा मुझको न दो, इलाज अपना करो
मेरे दादा-परदादा भी पागल न थे
न कोई पागल्पन मुझ में है
पाऊँ कैसे खुशी अपने ही प्यार में
जब के है दुःख भरा सारे संसार में
मुझको ऐसी खुशी से नहीं वासता
मेरा तो है अलग रास्ता
के: क्या? शादी नहीं चाहिये?
तो फिर route change
आँखों में हैं हीरे चमकते
चेहरे पर हैं, चाँद दमकते
गालों में हैं, फूल महकते
होंठों में हैं कलियाँ गुलाबी
दिल को बना दें जैसे शराबी
नाक तो थोड़ी oversize है
It's okay, madam. Plastic surgery कर देंगे
कविता: मेरी तो नाक जैसी है, तु अपना सर दिखा
लगता है तेरे सर में है, भूसा भरा हुआ
किसे पता, किसे खबर, तू आदमी है या बन्दर्