रात से कहो रुके ज़रा -2
मेरी जवानी का रक़्स वो देखले ज़रा
रात से कहो …
ए मेरे मेहरबानों ये मेरी बात मानो
फिर ना कभी ये रात आएगी
आई भी जो रात ना ये बात आएगी
मैं आज हूँ कल कहाँ
रात से कहो …
ऐ मुस्कराने वालों जी भर के मुस्करा लो
जाने फिर दिल का क़रार हो ना हो
ये जलवा ये रक़्स-ए-बहार हो ना हो
जो आज है कल कहाँ
रात से कहो …