ज़ो: परदेस न जइयो -2
मौसम सलोना है बरसात का
मौसम बरसात का
परदेस न जइयो जी
मो: ना कौल दिलइयो
( ना कौल दिलइयो
सजनी शादी की पहली रात का
मौसम बरसात का ) -2
ज़ो: परदेस न जइयो जी
रिमझिम-रिमझिम पड़ें फुहारें
भीगे केसर-चोली
हाँ भीगे केसर-चोली
रिमझिम-रिमझिम गिरें फुहारें
भीगे केसर-चोली
अबके सावन संग रहो तो -2
सावन मेरी हो ली
मो: ( डर लागे मोहे
चोरी-चोरी की मुलाक़ात का ) -2
मौसम बरसात का
ज़ो: परदेस न जइयो जी
मो: लाख रहूँ मैं दूर देस
ना भूलूँ याद तुम्हारी -2
लाख रहूँ मैं दूर देस
ना भूलूँ याद तुम्हारी
दिल्ली जा कर तुम्हें बुलाऊँ -2
मानो बात हमारी
ज़ो: मैं संग चलूँगी
( मैं संग चलूँगी
कौन्हों भरोसा तेरी बात का
मौसम बरसात का ) -2
परदेस न जइयो जी
को: बालम तू तो रस के लोभी
सोने पर ललचाये
हो सोने पर ललचाये
बालम तू तो रस के लोभी
सोने पर ललचाये
रूप-रंग की रात हमारी -2
यूँ ही बीती जाये
सब ताना देंगे -2
देखो जी सैंयाँ अपने हाथ का
मौसम बरसात का
परदेस न जइयो जी
परदेस न जइयो
( परदेस न जइयो
मौसम सलोना है बरसात का
मौसम बरसात का ) -2
परदेस न जइयो जी