मिली ख़ाक में मुहब्बत, जला दिल का आशियाना
जो थी आज तक हक़ीक़त, वही बन गई फ़साना
ये बहार कैसी आई, जो फ़िज़ां भी साथ लाई
मैं कहाँ रहूँ चमन में, मेरा लुट गया ठिकाना
मुझे रास्ता दिखाकर, मेरे कारवां को लूटा
इधर आ गले लगा लूँ, तुझे गरदिश-ए-ज़माना
मिली ख़ाक में मुहब्बत, जला दिल का आशियाना
जो थी आज तक हक़ीक़त, वही बन गई फ़साना
ये बहार कैसी आई, जो फ़िज़ां भी साथ लाई
मैं कहाँ रहूँ चमन में, मेरा लुट गया ठिकाना
मुझे रास्ता दिखाकर, मेरे कारवां को लूटा
इधर आ गले लगा लूँ, तुझे गरदिश-ए-ज़माना
milī khāk meṅ muhabbat, jalā dil kā āśhiyānā
jo thī āj tak haqīqat, vahī ban gaī fasānā
ye bahār kaisī āī, jo fizāṅ bhī sāth lāī
maiṅ kahāṇ rahūṇ chaman meṅ, merā luṭ gayā ṭhikānā
mujhe rāstā dikhākar, mere kārvāṅ ko lūṭā
idhar ā gale lagā lūṇ, tujhe gardiśh-e-zamānā