माज़न्दरान्! माज़न्दरान्! - 2
मेरे वतन्! मेरे जहान्! ऐ गुलसितान्! जन्नत-निशान्!
हर फूल तेरा इक चमन,
हर शाख़ है नाज़ुक दुल्हन
ऐ जान-ए-मन, ऐ जान-ए-मन
सदक़े तेरे …
सदक़े तेरे ये जिस्म-ओ-जान
माज़न्दरान्! माज़न्दरान्!
ज़र्रे हैं तेरे या गुहर,
पड़ती है शाहों की नज़र
लाल-ओ-जवाहिर इस क़दर,
मुमकिन नहीं …
मुमकिन नहीं जिनका बयान
माज़न्दरान्! माज़न्दरान्!
इक हुस्न की महफ़िल है तू,
हर शौक़ की मंज़िल है तू
हम आशिक़ों का दिल है तू,
हर लब पे तेरी दास्तान
माज़न्दरान्! माज़न्दरान्!