बा: हूँ हूँ
हे हे हे आ हा हा
सु: आ आ आ आ आ आ आ
बा: ( लगते तो हो तुम अजनबी
पर अजनबी तुम लगते नहीं ) -2
जाने कैसा ये एहसास है
जब से नज़रों के तू पास है
तू पास है
सु: लगते तो हो तुम अजनबी
पर अजनबी तुम लगते नहीं
जाने कैसा ये एहसास है
जब से नज़रों के तू पास है
तू पास है
बा: ( हूँ हूँ हूँ हूँ
दो: हो हो हो ) -2
सु: अंजान हो तुम अंजान हैं हम
अंजान हैं ये राहें
फिर भी लगे क्यों ढूँढ रही थीं
कब से तुझे ये निग़ाहें
बा: अंजान हो तुम अंजान हैं हम
अंजान हैं ये राहें
फिर भी लगे क्यों ढूँढ रही थीं
कब से तुझे ये निग़ाहें
तुम हो हक़ीक़त या हो ख़याल
दिल ने मेरे किया है सवाल
जाने कैसा ये एहसास है
जब से नज़रों के तू पास है
तू पास है
सु: लगते तो हो तुम अजनबी
पर अजनबी तुम लगते नहीं
बा: हो
( तू है कहाँ से किस आसमाँ से
संग क्यों चलने लगी है
सु: क्यों तक़दीरें धुंधली लक़ीरें
रंग बदलने लगी हैं ) -2
बा: दिल की लगी है या दिल्लगी
क्या ये तड़प है या दीवानगी
जाने कैसा ये एहसास है
जब से नज़रों के तू पास है
तू पास है
सु: लगते तो हो तुम अजनबी
पर अजनबी तुम लगते नहीं
जाने कैसा ये एहसास है
जब से नज़रों के तू पास है
तू पास है
बा: हूँ हूँ हूँ हूँ -2