जहर देता है, मुझे कोई दवाँ देता है
जो भी मिलता है, मेरे गम को बढ़ा देता है
किसी हमदम का सर-ए-शाम जुदा हो जाना
नींद जलती हुई आँखों से उड़ा देता है
वक़्त ही दर्द काँटों पे सुलाये दिल को
वक़्त ही दर्द का एहसास मिटा देता है
जहर देता है, मुझे कोई दवाँ देता है
जो भी मिलता है, मेरे गम को बढ़ा देता है
किसी हमदम का सर-ए-शाम जुदा हो जाना
नींद जलती हुई आँखों से उड़ा देता है
वक़्त ही दर्द काँटों पे सुलाये दिल को
वक़्त ही दर्द का एहसास मिटा देता है
jahar detā hai, mujhe koī davāṇ detā hai
jo bhī miltā hai, mere gam ko baṛhā detā hai
kisī hamdam kā sar-e-śhām judā ho jānā
nīṅd jaltī huī āṇkhoṅ se uड़ā detā hai
vaक़t hī dard kāṇṭoṅ pe sulāye dil ko
vaक़t hī dard kā ehsās miṭā detā hai