जहर देता है, मुझे कोई दवाँ देता है
जो भी मिलता है, मेरे गम को बढ़ा देता है
क्यों सुलगती हैं मेरे दिलमें पुरानी यादें
कौन बुझते हुये शोलों को हवा देता है
हाल हँस हँस के बुलाता है कभी बाहों में
कभी माझी मुझे रो रो के सदा देता है
जहर देता है, मुझे कोई दवाँ देता है
जो भी मिलता है, मेरे गम को बढ़ा देता है
क्यों सुलगती हैं मेरे दिलमें पुरानी यादें
कौन बुझते हुये शोलों को हवा देता है
हाल हँस हँस के बुलाता है कभी बाहों में
कभी माझी मुझे रो रो के सदा देता है
jahar detā hai, mujhe koī davāṇ detā hai
jo bhī miltā hai, mere gam ko baṛhā detā hai
kyoṅ sulagtī haiṅ mere dilmeṅ purānī yādeṅ
kaun bujhte huye śholoṅ ko havā detā hai
hāl hṇs hṇs ke bulātā hai kabhī bāhoṅ meṅ
kabhī mājhī mujhe ro ro ke sadā detā hai