गुज़र जाये दिन दिन दिन
कि हर पल गिन गिन गिन
किसी की हाय यादों में
किसी की हाय बातों में
किसी से मुलाक़ातों में
कि ये सिलसिले, जब से चले,
ख़्वाब मेरे हो गये रंगीन
रहे न दिल बस में ये
न माने कोई रसमें ये
कि खाऊँ मैं तो कसमें ये
उन्हें है पता
कि जग चाहे रूठे ये
कि जग चाहे छूटे ये
नाता नहीं टूटे ये, हाय
हा गुज़र जाये दिन …
कभी ये मेरा मन चाहे
फूलों के जहाँ हो साये
जहाँ पे हर दिल गाये
धुन प्यार की
ज़माने चाहे हो जायें
वहीं पे जाके खो जायें
वहीं पे जाके सो जायें, हाय
हा गुज़र जाये दिन …