सु: ( दिल ने जिसे अपना कहा -2
बे-ख़बर, वो है वहाँ
जाने पर ज़मीं-आसमाँ ) -2
मिली नज़र, उनसे पर
ये हवा तनहा
बातों में भी कह न सके
दिल की बात ये ज़ुबाँ
अब है हर सू, पल-पल बेकल
ढूँढें है उनको दिल
के चलें ज़रा उनसे ही मंज़िल
बोलें राज़-ए-दिल पर अब वो है कहाँ
दिल ने जिसे अपना कहा -2
बे-ख़बर, वो है वहाँ
जाने पर ज़मीं-आसमाँ
खिले-खिले कैसे हैं रंग
मिल के वो चँद से
दूर हैं हम मिल के भी
देखें ये आँखों से
टिम-टिम जागे आँखों के तारे
उनकी ही राहों में
के यूँ ही कभी उनके भी दिल में जागे मोहब्बत
आयें वो यहाँ
दिल ने जिसे अपना कहा -2
बे-ख़बर, वो है वहाँ
जाने पर ज़मीं-आसमाँ
क: शाम-ओ-सहर चारों पहर
ढूँढा तुझे हर दिशा
हाँ मगर हार कर
आ गई ये निगाह
साये को तेरे तरसे हैं आँखें
तड़पे है दिल मेरा
के तेरे बिना प्यार वफ़ा क्या, मेरा यहाँ क्या
अपना लुटा जहाँ
दिल ने जिसे अपना कहा -2
( खो गया है वो कहाँ
सूने हैं ज़मीं-आसमाँ ) -2