दिल तो है दीवाना ना
मानेगा बहाना न, रुक जाना
दिल की बातों में न आना
दीवाना तो दीवाना
दिल तो है दीवाना न …
रुकती है कहाँ दिल की अँगदाइयाँ
झूम जा मिल के गले
ज़रा धीरे कहो मन की शहनाइयाँ
पगले कोई सुन न ले
करेगा कोई क्या
मेरी जाँ, कहो हाँ
चुप्!
क्यों चुप
दिल तो है दीवाना न …
डरती हूँ कोई तूफ़ाँ न उठे कोई
शोर करून या चुप रहूँ
हम तो ठहरे नादाँ तुम तो नहीं
खुद समझ लो क्या कहूँ
तुम हो बड़े वो
मेरी जाँ कहो हाँ
चुप्!
तो चुप
दिल तो है दीवाना न …