आशा: छा गये बादल नील गगन पर
घुल गया कजरा साँझ ढले
आशा: देख के मेरा मन बेचैन
रैन से पहले हो गैइ रैन
आज ह्रिदय के स्वपन फले
घुल गया कजरा साँझ ढले
रफ़ी: रूप की संगत और एकान्त
आज भटकता मन है शान्त
कह दो समय से थम के चले
घुल गया कजरा साँझ ढले
रफ़ी: छा गये बादल नील गगन पर
घुल गया कजरा साँझ ढले
आशा: अंधियारों की चादर तान
एक होंगे दो व्याकुल प्राण
आज न कोई दीप जले
घुल गया कजरा साँझ ढले
दोनो: छा गये बादल नील गगन पर
घुल गया कजरा साँझ ढले