बदली से निकला है चाँद
परदेसी पिया लौट के तू घर आजा
पूछे पता तेरा ठंडी हवायें
चुप मुझे देख के चुप हो जाये
लाये तो कैसे तुझे ढूँढ के लाये
आ के गुजर गयी कितनी बहारें
और बरस गयी कितनी पुहारें
आ जा तुझे हम कब से पुकारे
बदली से निकला है चाँद
परदेसी पिया लौट के तू घर आजा
पूछे पता तेरा ठंडी हवायें
चुप मुझे देख के चुप हो जाये
लाये तो कैसे तुझे ढूँढ के लाये
आ के गुजर गयी कितनी बहारें
और बरस गयी कितनी पुहारें
आ जा तुझे हम कब से पुकारे
badlī se niklā hai chāṇd
pardesī piyā lauṭ ke tū ghar ājā
pūchhe patā terā ṭhaṅḍī havāyeṅ
chup mujhe dekh ke chup ho jāye
lāye to kaise tujhe ḍhūṇḍh ke lāye
ā ke gujar gayī kitnī bahāreṅ
aur baras gayī kitnī puhāreṅ
ā jā tujhe ham kab se pukāre