बाद मुद्दत के यह घडी आई
आप आये तो ज़िन्दगी आई
इश्क मर-मर के कामयाब हुआ
आज एक ज़र्रा आफताब हुआ
शुक्रिया ऐ हुजुर आने का
वक़्त जागा गरीबखाने का
एक ज़माने के बाद दीद हुई
ईद से पहले मेरी ईद हुई
ईद का चाँद आज देखा है
ईद का क्यों ना ऐतबार आए
हाथ उठाकर दुआ यह करता हूँ
ईद फिर ऐसी बार-बार आए
दिन ज़माने का, रात अपनी है
इस घडी कायनात अपनी है
इश्क पर हुस्न की इनायत है
मेरे पहलु में मेरी जन्नत है
फासले वक़्त ने मिटा ही दिए
दिल तड़पते हुये मिला ही दिए
काश इस वक़्त मौत आ जाए
जिंदगानी पे आके छा जाए