कि: अहा क्या तेरी ज़ुल्फ़ें हैं
अहा क्या तेरी आँखें हैं
अहा मैं जिसे उम्र भर
ढूँढा किया
वही है तू
आ: अहा क्या तेरी बातें हैं
अहा क्या मुलाक़ातें हैं
अहा दिल जिसे बिन मिले
चाहा किया
वही है तू
कि: अहा क्या तेरी ज़ुल्फ़ें हैं
कि: रुकी-रुकी दबी-दबी साँसें उफ़ तौबा
आ: दिल में मेरे चुभती हुई नज़रें उफ़ तौबा
कि: रुकी-रुकी दबी-दबी साँसें उफ़ तौबा
आ: हो
होँठ थर्राये
निगाहें ख़ुद-ब-ख़ुद शर्मा गईं
कि: क्या तेरी ज़ुल्फ़ें हैं
अहा क्या तेरी आँखें हैं
अहा मैं जिसे उम्र भर
ढूँढा किया
वही है तू
आ: अहा क्या तेरी बातें हैं
आ: आ आ
आ: धीरे-धीरे खुलने लगा राज़-ए-दिल मेरा
कि: तूने अभी छेड़ा ही क्यों साज़-ए-दिल मेरा
आ: धीरे-धीरे खुलने लगा राज़-ए-दिल मेरा
कि: हाँ
जब तू है साथ सनम
फिर कोई बात सनम
मानता है दिल कहीं
आ: क्या तेरी बातें हैं
अहा क्या मुलाक़ातें हैं
अहा दिल जिसे बिन मिले
चाहा किया
वही है तू
कि: अहा क्या तेरी ज़ुल्फ़ें हैं
कि: क्या हो अगर बाद-ए-सबा आँचल ढलका दे
आ: ऐसा न हो के तेरी नज़र कहीं शोले भड़का दे
कि: क्या हो अगर
आ: ह
कि: बाद-ए-सबा
आ: ह
कि: आँचल ढलका दे
आ: हो
होश उड़ जायेंगे आगे
बात कहने की नहीं
कि: क्या तेरी ज़ुल्फ़ें हैं
अहा क्या तेरी आँखें हैं
अहा मैं जिसे उम्र भर
ढूँढा किया
वही है तू
आ: अहा क्या तेरी बातें हैं
अहा क्या मुलाक़ातें हैं
अहा दिल जिसे बिन मिले
चाहा किया
वही है तू
कि: अहा क्या तेरी ज़ुल्फ़ें हैं