ऐ हवा कुछ तो बता जानेवालों का पता
काली घटाओं तुम छू के पहाड़ों को
लौट आना, हाँ तुम लौट आना
जंगल से जाती पगडंडियों पे
देखो तो शायद पाँव पड़े हों
कोहरे की दूधिया ठंडी गुफा में
बादल पहन के शायद खड़े हो
हौले से कानों में मेरा कहा कहना
लौट आना, हाँ तुम लौट आना
बुझने लगा है झीलों का पानी
घुलने लगा है शाम का सोना
कहाँ से थामूं रात की चादर
कहाँ से पकड़ूँ धुप का कोना
जाइयो पास उनके मेरा कहा कहना
लौट आना, हाँ तुम लौट आना