आयी ऋतू सावन की
पिया मोरा जा रे
आयी ऋतु सावन की
बैरन बिजुरी चमकन लागी
बदरी ताना मारे रे
ऐसे में कोई जाये पिया
तू रूठो क्यों जाये रे
आयी ऋतु सावन की
तुम ही अनुक बिदेस जवैया
सब आये हैं द्वारे रे
ऐसे में कोई जाये पिया
तू रूठो क्यों जाये रे
आये ऋतु सावन की