सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं
जिसको देखा ही नहीं उसको खुदा कहते हैं
ज़िन्दगी को भी सिला कहते हैं कहनेवाले
जीनेवाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं
फ़ासले उम्र के कुछ और बढ़ा देती है
जाने क्यूँ लोग उसे फिर भी दवा कहते हैं
चंद मासूम से पत्तों का लहू है फ़ाकिर
जिसको मेहबूब के हाथों की हिना कहते हैं