क्या मिल गया भगवान तुम्हे दिल को दुखाके
अरमानों की नगरी में मेरी आग लगा के
हम सोच रहे थे कभी दिल दिल से मिलेंगे
जीवन में मोहब्बत के कभी फूल खिलेंगे
ये क्या थी ख़बर तुमको न आयेगी दया भी
रख दोगे किसी दिन मेरी दुनिया को मिटाके
आकाश ही दुश्मन नहीं दुश्मन है ज़मीं भी
दुःख दर्द के मारों को नहीं चैन कहीं भी
इस जीने से अब मौत ही आ जाए तो अच्छा
जब छूट गया हाथ उनका मेरे हाथों में आके
मालूम न था खांक में मिल जायेंगे एक दिन
खुद अपनी ही हम आग में जल जायेंगे एक दिन
तुमसे तो ये उम्मीद न थी जल के खेवैया
नय्या को डुबो दोगे किनीरे ही पे लाके