कारे कारे बादरा, जा रे जा रे बादरा
मेरी अटरिया ना शोर मचा
काहे को जगाया ओ बैरी मैं तो सोयी थी
पापी तू क्या जाने मैं सपनों में खोयी थी
आँखों से मेरी ली निंदिया उड़ा
कभी इत आये तो कभी ऊत जाये रे
देख के अकेली तू मुझको डराये रे
सीखे कहाँ से ये ढंग छलिया
आ जा तूही आ जा पवन लहराइके
संग संग ले जा ये बदरा उडाइके
दूँगी दुवाएं हो तेरा भला