कभी कुछ पल जीवन के लगता है कि चलते चलते
कुछ देर ठहर जाते हैं
हर दिन की हलचल से आज मिली खामोशी
छल्की है तन मन में प्यार भरी मदहोशी
बदले बदले मौसम के मुझे रंग नजर जाते हैं
ये घड़ियां फुरसत की रोज कहाँ मिलती हैं
अब खुशियाँ हाथ मेरा थामे हुए चलती हैं
मेरे साथ गगन ये धरती मेरा गीत मधुर गाते है
इतना भला लगता है सूरज का ये ढलना
दुनिया से दूर छुपके यहाँ तेरा मेरा यूँ मिलना
कभी कभी दीवानेपन कि हम हद से गुज़र जाते हैं