ल: जिसका मुझे था इंतज़ार जिसके लिए दिल था बेक़रार
वो घड़ी ( आ गई ) -2
आज प्यार में हद से गुज़र जाना है
मार देना है तुझको या मर जाना है
मुझपे क्या गुज़री तू क्या जाने तू क्या समझे ओ दीवाने
ले के रहूँगी बदला तुझसे आई हूँ दिल की आग बुझाने
ओ क़ातिल मेरी नज़रों से बच के कहाँ जाएगा
दिया है जो मुझको वही तू मुझसे पाएगा
वो घड़ी ( आ गई ) -2
तीर बनके जिगर में उतर जाना है
मार देना है …
कि: जादू तेरा किसपे चला होगा किसी दिन ये फ़ैसला
वो घड़ी आएगी
जानाँ तूने अभी ये कहाँ जाना है
किसे जीना है और किसको मर जाना है
वो घड़ी आएगी …
होगा तेरा आशिक़ ज़माना औरों का दिल होगा तेरा निशाना
नाज़ न कर यूँ तीर नज़र पे आए हमें भी तीर चलाना
जो है खिलाड़ी उन्हें खेल हम दिखाएँगे
अपने ही जाल में शिकारी फँस जाएँगे
वो घड़ी ( आएगी ) -2
वक़्त आने पे तुझको समझाना है
मार देना है …