Jaun To Kahan Jaun

जाऊँ तो कहाँ जाऊँ
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जाऊँ तो कहाँ जाऊँ
सबकुछ यहीं है
तेरे घर के बाहर तो न दुनिया न दिन है

जैसे भी राखो बिहारी मोहे
जग तो पुकारे तिहारी मोहे
तेरे द्वार आके जाना नहीं है

प्रीत तेरे संग जोड़ी पिया
चुनरी तेरे रंग ओढ़ी पिया
कहीं और घुँघटा उठाना नहीं है